लोकसभा में पेपर लीक विरोधी बिल पास: 10 साल की जेल, ₹10 करोड़ का जुर्माना, फास्ट-ट्रैक कोर्ट; मॉनसून सत्र में हंगामा।
नई दिल्ली | द्वारका न्यूज़ | संसद विशेष

संसद के मानसून सत्र के दौरान भारी राजनीतिक हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच लोकसभा ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशंस (संशोधन) विधेयक’ (Anti Paper Leak Bill) को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का दावा है कि यह कानून देशभर में होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक पर रोक लगाने और नकल माफियाओं पर कड़ा शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने विपक्ष पर इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित व विश्वसनीय बनाने के लिए कठोर कानून आवश्यक हैं।
बिल की प्रमुख विशेषताएं
– पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों में दोषी पाए जाने पर 5 से 10 वर्ष तक की सजा।
– सॉल्वर गैंग और संगठित अपराध में शामिल लोगों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना।
– मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन।
– अदालतों में रोजाना सुनवाई और 3 माह के भीतर फैसला देने का लक्ष्य।
– पुलिस एवं स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को 2 महीने के भीतर जांच पूरी करने का प्रावधान।
सदन में जोरदार हंगामा
विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों को सरकार की विफलता बताया और जवाबदेही तय करने की मांग की। इस दौरान कई बार सदन में तीखी बहस और नारेबाजी देखने को मिली।
सरकार का पक्ष
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार उच्च शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं के लिए शिक्षा और अवसरों का दायरा लगातार बढ़ाया गया है तथा नया कानून परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
वहीं, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग करें।
छात्रों पर क्या होगा असर?
यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और संगठित परीक्षा अपराधों के खिलाफ कार्रवाई पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर होगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल सख्त कानून पर्याप्त नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार भी जरूरी हैं।








