वर्तमान समय में भागवत सप्ताह पारायण आदि ग्रंथों के पारायण के रूप में यह क्या हो रहा है

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वर्तमान समय में भागवत सप्ताह पारायण आदि ग्रंथों के पारायण के रूप में यह क्या हो रहा है

वर्तमान समय में बड़े-बड़े कथावाचकों द्वारा बड़ी-बड़ी कथाओं का आयोजन हो रहा है

 

यजमान आदि भी उनको कराके बड़े गौरांवित महसूस करते हैं और उन्हे ऐसा लगता है कि बहुत बड़ा पुण्य उन्होंने प्राप्त किया तथा भागवत में जो महात्म्य वर्णित है उनको लगता है की वह उन्हें प्राप्त हो गया

 

परंतु आप विचार करें कि क्या वर्तमान कथावाचकों द्वारा संपूर्ण भागवत का यजमान को श्रवण कराया जा रहा है?

 

दिन में तीन से चार घंटे वर्तमान समय में कथा होती है|

 

भागवत में 18000 श्लोक है| इनके अध्यायों का सार सार भी सुनाया जाए तो कम से कम 4 से 5 घंटे लगेंगे|

 

परंतु आप देखेंगे वर्तमान समय में कथा वाचक भागवत के नाम से उन 3 घंटे में भागवत छोड़कर पता नहीं सामाजिक प्रसंग व्यावहारिक प्रसंग, राजनीतिक प्रसंग पता नहीं क्या-क्या सुना देते हैं?

 

क्या अगर सही से भागवत सुनाई जाए तो क्या दूसरे विषय पर बोलने के लिए कुछ समय मिलेगा?

 

जब भागवत कथा कही जाती है तब वहां देवता ऋषि मुनि सभी आ कर बैठते हैं तो क्या वे ऋषि मुनि इसलिए आकर बैठे हैं कि राजनीतिक वार्ता या व्यवहारिक वार्ता सुने वे तो भगवान का कथा अमृत रसपान करने आए हैं|

 

कुछ लोग कहते हैं कि श्रोता लोग अच्छे से बैठे रहे सुनते रहे इसलिए व्यावहारिक प्रसंग राजनीतिक प्रसंग सास बहू की चर्चा करनी पड़ती है

 

परंतु आप विचार करिए कि हमारे शास्त्रों में स्पष्ट रूप से लिखा है जब तक मन दूषित रहता है तब तक भगवान की कथा में प्रीति नहीं होती परंतु कथा सुनते-सुनते धीरे-धीरे मन पवित्र होता है फिर भगवान की कथा में प्रीति हो जाती है|

 

तुलसीदास जी ने भी लिखा कि बुखार से पीड़ित व्यक्ति को मिश्री जो है वह कड़वी लगती है परंतु जैसे-जैसे बुखार की औषधि चलती है और बुखार शांत होने लगता है मिश्री मीठी लगने लगती है इस प्रकार से जब कथा सुनते-सुनते श्रोता का हृदय पवित्र हो जाएगा तो उसकी कथा अच्छी लगने लगेगी| आपको विशेष प्रयत्न नहीं करना पड़ेगा|

 

इसलिए अभी अगर श्रोता का मन नहीं लग रहा है तो आपको सास बहू आदि की चर्चा व्यावहारिक चर्चा करने की जरूरत नहीं है|

 

डॉक्टर जो है वह मरीज के अनुसार दवाई नहीं लिखता कि मरीज को जो दवाई पसंद है वही लिखेंगे भैया रोग जो है वह जिससे ठीक हो जाए उसके अनुसार दवाई डॉक्टर लिखता है और उससे लाभ होता है|

 

अगर वह मरीज के रुचि के अनुसार दवाई लिखे तो मरीज भी मरेगा और डॉक्टर पर भी कार्रवाई होगी|

 

इसी प्रकार आपको भगवान की प्रसन्नता के लिए देवताओं की प्रसन्नता के लिए ऋषि मुनियों की प्रसन्नता के लिए भागवत करना और सुना है ना कि अपनी प्रसन्नता के लिए या सामने वाले को जो अच्छा लगे उसके अनुसार

 

वर्तमान समय में भागवत सप्ताह पारायण आदि ग्रंथों के पारायण के रूप में यह क्या हो रहा है

 

Vikram singh tomar
Author: Vikram singh tomar

DWARKA NEWS NATIONAL NETWORK

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