यूजीसी और आरक्षण नीति के खिलाफ गुना में सवर्ण समाज का शक्ति प्रदर्शन
शास्त्री पार्क से कलेक्ट्रेट तक उमड़ा जनसैलाब, युवाओं के साथ 80 वर्षीय बुजुर्ग ने कराया मुंडन; नेताओं की सांकेतिक अर्थी निकालकर जताया विरोध
द्वारका न्यूज़ |
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर |
9 सितंबर 2026
गुना। उच्च शिक्षा में समानता, आरक्षण व्यवस्था में संशोधन और एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव की मांग को लेकर बुधवार को गुना में सवर्ण समाज ने बड़ा प्रदर्शन किया। सवर्ण समाज संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में शास्त्री पार्क से निकली आक्रोश रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान विरोध का अनोखा और भावुक रूप भी देखने को मिला। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में युवाओं के साथ करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग ने सार्वजनिक रूप से मुंडन कराया। इसके बाद नेताओं की सांकेतिक अर्थी निकालकर प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध दर्ज कराया। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया।
‘जाति नहीं, गरीबी देखो’ के नारों से गूंजा शहर
रैली में प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘यूजीसी वापस लो’, ‘जाति नहीं गरीबी देखो’, ‘काले कानून वापस लो’ और ‘याचना नहीं, अब रण होगा’ जैसे नारों वाली तख्तियां थीं। रैली में महिलाओं, युवाओं, सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों, कथा वाचकों और आम नागरिकों की भी भागीदारी रही। कुछ युवा छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र लेकर भी पहुंचे।
वीणा राणेकर ने उठाए यूजीसी नियमों पर सवाल
प्रदर्शन में सपाक्स की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी वीणा राणेकर भी शामिल हुईं। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सभी विद्यार्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए। मंच से वक्ताओं ने आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाए जाने की मांग दोहराई।
प्रदर्शनकारियों ने एट्रोसिटी एक्ट में भी संशोधन की मांग उठाई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कानून के दुरुपयोग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इसमें आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान बताए गए जेल में बंद लोगों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
रैली के समापन पर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से यूजीसी के नियमों पर पुनर्विचार, आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक आधार को प्राथमिकता देने और एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन की मांग की। कलेक्ट्रेट परिसर में ज्ञापन सौंपने के साथ प्रदर्शन समाप्त हुआ।








