गुना नपा में ‘महाभारत’! अध्यक्ष ने सिंधिया को लिखा पत्र, इस्तीफे की चेतावनी से गरमाई सियासत

65 टेंडर अटके-निरस्त, 800 से ज्यादा नामांतरण लंबित, 2 हजार स्ट्रीट लाइटें बंद; नपाध्यक्ष सविता गुप्ता का आरोप—अधिकारी जानबूझकर शहर की व्यवस्थाएं बिगाड़ रहे
गुना | 4 अक्टूबर 2026 | द्वारका न्यूज़
गुना नगरपालिका परिषद में लंबे समय से चल रही प्रशासनिक खींचतान अब खुलकर राजनीतिक विवाद में बदलती नजर आ रही है। नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को तीन पृष्ठों का शिकायती पत्र भेजकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की कथित मनमानी के कारण शहर के विकास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने स्थिति में सुधार नहीं होने पर इस्तीफा देने तक की चेतावनी दी है।
दूसरी तरफ अधिकारियों का कहना है कि हम पर लगाए गए आरोप निराधार है
‘षड्यंत्र के तहत बिगाड़ी जा रही शहर की व्यवस्था’
अध्यक्ष ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि पिछले करीब 15-16 महीनों से नगरपालिका की प्रशासनिक व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है। उनका दावा है कि विकास कार्यों से जुड़े करीब 65 टेंडर निरस्त या लंबित कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को कथित तौर पर राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बनाकर ऐसी परिस्थितियां पैदा की जा रही हैं, जिससे नाकामी का ठीकरा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर फूटे।
पत्र में अध्यक्ष ने विधानसभा, लोकसभा और उपचुनाव में भाजपा की जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि गुना नगरपालिका क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में सिंधिया को बड़ी बढ़त मिली थी। इसके बावजूद पार्टी के कुछ लोगों पर उन्होंने उनके और उनके पति पूर्व भाजपा नेता अरविंद गुप्ता को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
2 हजार स्ट्रीट लाइट बंद, 800 से ज्यादा नामांतरण अटके
नपाध्यक्ष के अनुसार गुना शहर में करीब 12 हजार स्ट्रीट लाइटें हैं, जिनमें से लगभग 2 हजार लंबे समय से बंद हैं। इनके रखरखाव के लिए पीआईसी द्वारा करीब 45 लाख रुपये की स्वीकृति दिए जाने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया में देरी का आरोप लगाया गया है।
इसी तरह श्रीराम मुक्तिधाम और कैंट मुक्तिधाम के करीब डेढ़ करोड़ रुपये के विकास कार्यों की तकनीकी स्वीकृति लंबित होने की बात पत्र में कही गई है। अध्यक्ष के मुताबिक 800 से अधिक नामांतरण फाइलें सीएमओ के हस्ताक्षर के अभाव में लंबित हैं। परिषद की बैठक बुलाने के लिए दिए गए लिखित पत्रों पर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
महिला जनप्रतिनिधि के ‘स्वाभिमान’ का मुद्दा, इस्तीफे की चेतावनी
अध्यक्ष ने पत्र में प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के साथ लगातार ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जिससे उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंच रही है। उन्होंने कलेक्टर स्तर से कथित अनुचित व्यवहार, शिकायतों पर जांच और परिवार से जुड़ी जांचों का भी उल्लेख किया है।
उन्होंने लिखा कि यदि परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो मजबूरी में पार्टी की महिला जनप्रतिनिधि को अपने पद से इस्तीफा देकर घर बैठना पड़ सकता है।
‘अधिकारी बदले, जनप्रतिनिधि वही; फिर जिम्मेदारी किसकी?’
अध्यक्ष ने वरिष्ठ भाजपा नेतृत्व से पूरे मामले में हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी मंत्री, संभागीय संगठन प्रभारी और भाजपा जिलाध्यक्ष को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नगरपालिका की प्रशासनिक खींचतान के कारण सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, आवास, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र और नामांतरण जैसी नागरिक सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
अधिकारी बदलते रहे, लेकिन शहर और जनता वहीं है। राजनीतिक खींचतान के बीच आम नागरिक को रोजमर्रा की सुविधाओं का नुकसान उठाना पड़ रहा है। गुना की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि ट्रिपल इंजन सरकार में नगर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी है—निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की या प्रशासनिक अधिकारियों की?
जनता के सामने बड़ा सवाल
गुना नगरपालिका का यह विवाद अब केवल अध्यक्ष और अधिकारियों के बीच का प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है। यह सीधे तौर पर शहर की मूलभूत सुविधाओं और आम जनता के हितों से जुड़ गया है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जनता को समय पर सुविधाएं कौन देगा और व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में जवाबदेही तय कौन करेगा?







