कायाकल्प निरीक्षण में खुली जिला अस्पताल की पोल, शिवपुरी से आई टीम ने चमक-दमक के पीछे पकड़ीं बड़ी खामियां
द्वारका न्यूज़ नेशनल नेटवर्क
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
*आईडी कार्ड के लिए मची अफरातफरी
*रजिस्टर अधूरे
*गंदे मिले चादर और गददे
*स्टोर रुम मे महत्वपूर्ण रजिस्टर मेंनटेन नहीं मिले,
*बिना आईडी के कई करमचारी मिले
*जीवन रक्षक दवाओ की समय-सीमा का बोर्ड नहीं
*प्रोटोकॉल के तहत कोई कार्य नहीं
गुना (ईएमएस)। जिला चिकित्सालय में पिछले कई दिनों से चल रही कायाकल्प की तैयारियों और साफ-सफाई के दावों की हवा उस समय निकल गई, जब शनिवार को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से आए विशेषज्ञों के दल ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। टीम ने पाया कि अस्पताल प्रशासन ने केवल बाहरी दिखावे और पुताई पर ध्यान दिया, जबकि बुनियादी सेवाओं और प्रोटोकॉल में कदम-कदम पर लापरवाही बरती जा रही थी।
दरअसल तीन सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने सबसे पहले दवा वितरण केंद्र और मुख्य स्टोर रूम का रुख किया। यहाँ टीम उस समय भडक़ गई जब उन्होंने देखा कि दवाओं के स्टॉक पर उनकी एक्सपायरी डेट का स्पष्ट प्रदर्शन नहीं किया गया था। विशेषज्ञों ने सख्त लहजे में कहा कि यदि दवाओं की समय-सीमा का बोर्ड नहीं होगा, तो जीवन रक्षक दवाओं के बेकार होने का खतरा बना रहता है। टीम ने निर्देश दिए कि हर दवा को उसकी एक्सपायरी के अनुसार क्रमबद्ध रखा जाए ताकि उनका समय रहते सदुपयोग हो सके।
आईडी कार्ड के लिए मची अफरातफरी, कटे नंबर
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के कई कर्मचारी बिना पहचान पत्र के ड्यूटी करते पाए गए। इस पर टीम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि केवल अस्पताल को चमका देने से अच्छे अंक नहीं मिलते; अनुशासन और नियमों का पालन न होने पर कायाकल्प रैंकिंग के नंबर काटे जाएंगे। टीम की फटकार के बाद अस्पताल में हडक़ंप मच गया। स्थिति यह बनी कि सीएमएचओ डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर को मौके पर ही सख्त निर्देश जारी करने पड़े, जिसके बाद कई कर्मचारी आनन-फानन में अपने घरों से आईडी कार्ड मंगवाते नजर आए।
रजिस्टर अधूरे, गंदे मिले चादर और गद्दे
विशेषज्ञों ने वार्डों का भ्रमण करते समय मरीजों के लिए बिछाए गए गद्दों और चादरों की स्थिति पर भी असंतोष जाहिर किया। इसके अलावा, स्टोर रूम के कई महत्वपूर्ण रजिस्टर मेंटेन नहीं मिले, जो प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करते हैं। निरीक्षण के दौरान अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह रघुवंशी सहित अन्य चिकित्सा अधिकारी साथ रहे, जिन्हें टीम ने कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने की हिदायत दी।
बैठक में दी गई अंतिम चेतावनी
अस्पताल के हर कोने की बारीकी से जांच करने के बाद टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। विशेषज्ञों ने दो टूक शब्दों में कहा कि तैयारियों के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। सामने आई कमियों को यदि जल्द दूर नहीं किया गया, तो कायाकल्प योजना के तहत अस्पताल की ग्रेडिंग प्रभावित होना तय है। कुल मिलाकर, हफ्तों की तैयारी के बाद भी जिला अस्पताल निरीक्षण की अग्निपरीक्षा में संघर्ष करता नजर आया।









