ईरान- US युद्ध संकट से कैसे प्रभावित हुईभारत की गैस और तेल सप्लाई और कौन-कौन से सेक्टर होंगे प्रभावित?
ईरान-अमेरिका (और इज़राइल) के बीच जारी संघर्ष के कारण 2026 की शुरुआत में भारत में गंभीर गैस और तेल संकट की स्थिति पैदा हो गई है। फारस की खाड़ी में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से लगभग 60% गैस आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है। इसका सीधा असर LPG की किल्लत और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिल सकता है, जिससे 33 करोड़ से अधिक LPG उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं।
ईरान-अमेरिका युद्ध का भारत में गैस संकट: मुख्य बिंदु
आपूर्ति श्रृंखला बाधित: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाली तेल और गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 62% आयात करता है, जो अब जोखिम में है।
कीमतों में उछाल: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, भारत में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹115 की बढ़ोतरी हो चुकी है।
व्यावसायिक असर: कमर्शियल एलपीजी की कमी से होटल और रेस्तरां उद्योग को बड़ा झटका लगा है, जिससे 50% से अधिक भोजनालय बंद होने की चेतावनी दी गई है।
बैकअप योजना: भारत सरकार ने कतर से LNG आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है, लेकिन युद्ध की स्थिति को देखते हुए आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कोयले पर निर्भरता: गैस संकट के चलते बिजली उत्पादन के लिए भारत को फिर से कोयले पर अधिक निर्भर होना पड़ रहा है।
इस तनाव के कारण भारत में ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी मुश्किलें पैदा हो गई हैं, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक चुनौती है।







