नर्मदा परिक्रमा की यह कठिन साधना देख कर आंखें नम और मस्तक श्रद्धा से झुक गया.
3600 किलोमीटर की यह यात्रा केवल हाथों के बल तय करना कोई साधारण कार्य नहीं है.
यह केवल सनातन धर्म और माँ नर्मदा के प्रति अटूट विश्वास से ही संभव है.
धन्य है भारत की यह पावन धरती और यहाँ के तपस्वी साधु संत.







