गुना जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को कुछ पल के लिए ठहरने पर मजबूर कर दिया। एक युवक, बदहवास और अर्धनग्न अवस्था में, हाथ में फटा हुआ आवेदन लिए न्याय की गुहार लगा रहा था। उसकी आवाज में गुस्सा कम और मज़बूरी ज्यादा थी—जैसे वह सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि व्यवस्था से हार चुके हर इंसान की कहानी बता कर रहा हो।
इस युवक की पहचान गुना तहसील के ग्राम बरखेड़ागिर्द निवासी खेरू आदिवासी के रूप में हुई है। खेरू का दावा है कि उसने पिछले तीन वर्षों में दिन-रात मजदूरी कर करीब 5 लाख रुपये जोड़े थे। यह रकम उसके लिए सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि उम्मीदों का सहारा थी—क्योंकि इन्हीं पैसों से उसके भांजे की शादी होनी थी।
लेकिन खेरू के मुताबिक, यह उम्मीद उस वक्त टूट गई जब टोल टैक्स के पास कुछ अज्ञात लोगों ने उसे रोककर पूरी रकम छीन ली। उसने आरोप लगाया कि बदमाशों ने न केवल पैसे लूटे, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की और उसके कपड़े तक फाड़ दिए। यह घटना उसके लिए सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि आत्मसम्मान पर भी गहरी चोट बनकर सामने आई।
घटना के बाद न्याय की तलाश में परेशान खेरू संबंधित थाने पहुंचा, लेकिन उसका कहना है कि वहां उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप तो यहां तक है कि उसका आवेदन फाड़कर उसे थाने से भगा दिया गया। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो वह सीधे गुना कलेक्ट्रेट पहुंच गया—शायद इस उम्मीद में कि यहां उसकी आवाज सुनी जाएगी।
कलेक्ट्रेट परिसर में जब उसने भीतर जाने की कोशिश की, तो सुरक्षा में तैनात महिला गार्ड और अन्य कर्मियों ने उसे रोक दिया। इसके बाद गेट के बाहर ही उसका विरोध जारी रहा। कुछ देर में वहां भीड़ जुट गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। खेरू बार-बार अपनी आपबीती दोहराता रहा, कभी रोता, कभी गुस्से में चिल्लाता—मानो उसकी पीड़ा शब्दों से बाहर निकलने का रास्ता खोज रही हो।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी सामने आया। मौके पर मौजूद कुछ प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि युवक नशे की हालत में प्रतीत हो रहा था और उसकी मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं लग रही थी। उसकी लड़खड़ाती आवाज और असंतुलित व्यवहार को इसका कारण बताया गया। हालांकि, इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि न तो कोई मेडिकल परीक्षण किया गया और न ही प्रशासन की ओर से इस पर स्पष्ट बयान सामने आया है।
गुना कलेक्ट्रेट में उपस्थित अधिकारियों ने स्थिति को संभालने और युवक को शांत कराने की कोशिश की। कुछ समय बाद खेरू वहां से लौट गया, लेकिन अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया—क्या सच में उसके साथ लूट की घटना हुई? अगर हुई, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर नहीं हुई, तो फिर यह विरोध किस दर्द का परिणाम है?
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की भी झलक है, जहां आम आदमी की आवाज अक्सर भीड़ में खो जाती है। सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल खेरू की यह तस्वीर—फटा आवेदन, अर्धनग्न शरीर और न्याय की गुहार—प्रशासनिक व्यवस्था पर कई असहज सवाल जरूर खड़े कर रही है।
अब नज़रे प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या खेरू को न्याय मिलेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा—इसका जवाब आने वाला समय में ही मिलेगा।
नोट:
इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक स्टेटमेंट सामने नहीं आया है। जैसे ही प्रशासन की कार्यवाही मिलेगी, खबर को अपडेट किया जाएगा।








