तमिलनाडु में बड़े सियासी उलटफेर की अटकलें
#DMK और #AIADMK मिलकर सरकार बनाने की ओर
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों DMK और AIADMK ने सरकार गठन को लेकर आपसी बातचीत तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक अहम बैठक भी हुई है, जिसमें संभावित सत्ता साझेदारी और राजनीतिक स्थिरता को लेकर चर्चा की गई।
इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदलकर रख दिया है, खासकर ऐसे समय में जब TVK ने 113 विधायकों के समर्थन का दावा कर सरकार गठन की कोशिश की है।
सूत्रों का कहना है कि DMK और AIADMK, दोनों ही दल मौजूदा राजनीतिक अनिश्चितता और त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति को देखते हुए स्थिर सरकार के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालिया बैठक में सरकार गठन, नेतृत्व की भूमिका और न्यूनतम साझा कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
हालांकि अभी तक किसी भी पार्टी ने आधिकारिक रूप से गठबंधन की घोषणा नहीं की है, लेकिन अंदरखाने की बातचीत ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
वर्तमान स्थिति में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा है। TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन अकेले बहुमत से पीछे है। DMK और AIADMK दोनों ही विपक्षी स्थिति में कमजोर नजर आ रहे हैं। कांग्रेस का समर्थन TVK के लिए महत्वपूर्ण लेकिन पर्याप्त नहीं है। CPI और CPM जैसे दल सीमित सीटों के साथ किंगमेकर की भूमिका में हैं।
TVK के दावे के बीच बदलते समीकरण
इससे पहले TVK की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश किया गया था और 7 मई को शपथ ग्रहण की संभावना भी जताई जा रही थी। लेकिन बहुमत के स्पष्ट आंकड़े (118 सीटें) को लेकर स्थिति अब भी असमंजस में है।
इसी बीच DMK और AIADMK के बीच बढ़ती नजदीकियों ने पूरे राजनीतिक समीकरण को नया मोड़ दे दिया है।
234 सदस्यीय विधानसभा में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में छोटी पार्टियों और निर्दलीयों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। DMK और AIADMK की संभावित साझेदारी इस पूरे समीकरण को पूरी तरह बदल सकती है।
234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का गणित
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं, और बहुमत के लिए 118 सीटें जरूरी हैं। टीवीके ने 108 सीटों में जीत दर्ज की है। विजय दो सीटों पर लड़े थे। यानी कि एक से इस्तीफा देंगे। ऐसे में उन्हें मिलाकर 107 विधायक हैं। DMK के पास 59 सीटें, AIADMK के पास 47 सीटें, कांग्रेस के पास 5 सीटें, सीपीआई और सीपीएम के पास दो-दो सीटें, अन्य छोटे दल और निर्दलीय मिलाकर 11 विधायक हैं।
राज्यपाल के पास जिस तरह टीवीके ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है तो कांग्रेस और टीवीके मिलाकर 113 विधायक होते हैं। अभी भी बहुमत के लिए अन्य दलों की जरूरत पड़ेगी।
वहीं, अगर डीएमके और एआईएडीएमके को मिलाकर 106 विधायक हैं। बहुमत के लिए 12 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में उसे भी अपने साथ कांग्रेस को मिलाना होगा। इसके बाद ही सरकार बनाने की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
राजनीतिक माहौल में तेजी से बदलाव
राज्य में राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं। विभिन्न दल अपने-अपने स्तर पर रणनीति बदलने में जुट गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर DMK और AIADMK एक साथ आते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में दशकों बाद सबसे बड़ा सियासी गठबंधन होगा।
तमिलनाडु की राजनीति इस समय निर्णायक और अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच चुकी है। DMK और AIADMK के बीच संभावित समझौते की चर्चा ने TVK के उभरते दावे और मौजूदा सत्ता समीकरणों को चुनौती दे दी है। आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इसी राजनीतिक खींचतान के चलते 7 मई को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि जल्द ही संख्या पूरी नहीं हुई तो प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है या नई राजनीतिक बातचीत शुरू हो सकती है।
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