भारतीय शेयर मार्केट में ब्लैक मंडे, 19 लाख करोड़ रुपये हुए स्वाहा, सेंसेक्स 3300 अंक टूटा
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
जिला संपादक सन्देश झा
सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरवट है। टाटा स्टील से लेकर हिन्दुस्तान यूनिलीवर तक में करीब 10 फीसद से 0.59 फीसद तक की गिरावट है। सेंसेक्स 4.47 पर्सेंट या 33723270 अंकों का गोता लगाकर 71,992.49 पर है। एनएसई के निफ्टी में भी 4.67 पर्सेंट की गिरावट है। यह 1069 अंको नीचे 21834 पर आ गया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के चलते पिछले सप्ताह अमेरिकी शेयर बाजार में भूचाल आ गया था। अब कल सोमवार का दिन कैसा रहेगा इस पर दुनियाभर के निवेशकों की नजर है। बीते शुक्रवार को एसएंडपी 500 में 6 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई। वहीं, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 2,231 अंक लुढ़क गया था। नैस्डैक की बात करें तो यह 948.58 अंक गिरकर 15,602.03 अंक पर बंद हुआ था। यह अमेरिकी शेयर बाजार में कोविड-19 महामारी के बाद सबसे बड़ी गिरावट थी। इधर, ग्लोबल मार्केट को लेकर एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
क्या है रिपोर्ट
प्रसिद्ध हार्वर्ड विश्वविद्यालय से कानून में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त जिम क्रैमर, द स्ट्रीट के फाउंडर और सीएनबीसी शो \”मैड मनी\” के होस्ट ने ग्लोबल मार्केट के निवेशकों को सोमवार, 7 अप्रैल को शेयर बाजारों के फिर से खुलने के बाद होने वाली संभावित खूनखराबे के बारे में चेतावनी दी। समाचार पोर्टल एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जिम क्रैमर का अनुमान है कि सोमवार का शेयर बाजार संभवतः 1987 के \’ब्लैक मंडे\’ जैसा होगा, जिसे 19 अक्टूबर 1987 को पहले समकालीन ग्लोबल आर्थिक संकट के समय देखा गया था। क्रैमर के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों के बीच चल रहे व्यापार युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अगले कदम पर निर्भर होंगे। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, \”यदि राष्ट्रपति ट्रम्प अड़ियल रुख अपनाते हैं और पिछले कुछ दिनों में जो नुकसान मैंने देखा है, उसे कम करने के लिए कुछ नहीं करते हैं, तो मैं यहां रचनात्मक नहीं हो पाऊंगा।\” बता दें कि यह चेतावनी अमेरिकी शेयर बाजारों में कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद सबसे खराब कारोबारी सत्र और सबसे बड़ी गिरावट के बाद आई है।
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ब्लैक मंडे को क्या हुआ था?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (फेड) के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 19 अक्टूबर 1987 को, जिसे \’ब्लैक मंडे\’ के नाम से भी जाना जाता है, डॉव जोन्स एक ही कारोबारी सत्र में 22.6 प्रतिशत गिर गया, जो इतिहास में सबसे बड़ी एक दिवसीय शेयर बाजार क्रैश था।
भारतीय शेयर बाजार पर भी असर?
इस सप्ताह स्थानीय शेयर बाजारों में कई तरह के घटनाक्रमों के बीच काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। एनालिस्ट कहना है कि एक तरफ निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क के वैश्विक व्यापार और महंगाई पर व्यापक असर का आकलन कर रहे हैं, वहीं सप्ताह के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक भी है। इसके अलावा अमेरिका से मुद्रास्फीति के आंकड़े भी आने हैं। ये सभी घटनाक्रम बाजार को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को आशंका है कि एक पूर्ण व्यापार युद्ध वैश्विक व्यापार और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करेगा। मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा, ‘‘यह सप्ताह वैश्विक और भारतीय बाजारों के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के विभिन्न देशों पर शुल्क लगाया है, जिससे व्यापक व्यापार युद्ध और वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाएं बढ़ गई हैं।’’ सिंघानिया ने कहा, ‘‘अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक का ब्योरा भी सप्ताह के दौरान जारी किया जाएगा।’’









