संजय स्टेडियम खेल का मैदान या शराबियों का अड्डा?
आवारा तत्वों के आतंक से खिलाड़ी सहमे, कांच के टुकड़ों पर दौड़ने को मजबूर; पुलिस, खेल विभाग और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
विशेष रिपोर्ट | प्रधान संपादक : विक्रम सिंह तोमर
द्वारका न्यूज़ | गुना (मध्य प्रदेश)
गुना शहर का संजय स्टेडियम, जहां से जिले के खिलाड़ी प्रदेश और देश का नाम रोशन करने का सपना देखते हैं, आज अव्यवस्था और असामाजिक तत्वों के कब्जे में दिखाई दे रहा है। सुबह-शाम अभ्यास करने आने वाले खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब खेल नहीं, बल्कि स्टेडियम में फैली गंदगी, शराब की बोतलें और असामाजिक गतिविधियां बन गई हैं।
स्थानीय खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का कहना है कि हर रात स्टेडियम में असामाजिक तत्व प्रवेश कर शराब पीते हैं और खाली शराब की बोतलें, गुटखा एवं तंबाकू के पाउच मैदान में फेंक जाते हैं। सुबह जब खिलाड़ी अभ्यास करने पहुंचते हैं तो मैदान में टूटे हुए कांच बिखरे रहते हैं। कई बार खिलाड़ियों के पैरों में कांच चुभने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे चोट लगने का खतरा लगातार बना रहता है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि प्रशिक्षकों के अनुसार यदि वे इन असामाजिक तत्वों को रोकने या समझाने का प्रयास करते हैं तो वे विवाद और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षक और खिलाड़ी दोनों स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्टेडियम की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी इस समस्या से बेखबर हैं। वहीं खेल विभाग भी स्टेडियम की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर प्रभावी कदम उठाता नजर नहीं आ रहा। इससे खिलाड़ियों में नाराजगी बढ़ रही है।
खिलाड़ियों की प्रमुख मांगें
स्टेडियम के खुलने और बंद होने का समय सख्ती से निर्धारित किया जाए।
बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए।
पूरे परिसर में उच्च गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
नियमित पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
शराब पीने, गंदगी फैलाने और असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
खेल विभाग द्वारा नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन से अपील
संजय स्टेडियम केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि जिले के खिलाड़ियों के भविष्य की नींव है। यदि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो किसी खिलाड़ी के साथ गंभीर दुर्घटना हो सकती है। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और खेल विभाग को तत्काल संयुक्त कार्रवाई कर स्टेडियम को सुरक्षित एवं अनुशासित खेल परिसर बनाना चाहिए।
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✍️ प्रधान संपादक : विक्रम सिंह तोमर
द्वारका न्यूज़ | गुना (मध्य प्रदेश)
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