तेंदुआ’ शब्द सुनते ही दिल दहल जाता है — लेकिन कभी-कभी प्रकृति डर नहीं, बल्कि हैरानी और जादू से भर देती है।

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तेंदुआ’ शब्द सुनते ही दिल दहल जाता है — लेकिन कभी-कभी प्रकृति डर नहीं, बल्कि हैरानी और जादू से भर देती है।

प्रधान संपादक विक्रम सिंह

हाल ही में महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले के एक गांव में मज़दूरों को काजू के बागान में काम करते समय एक बेहद दुर्लभ नज़ारा देखने को मिला — दो तेंदुए के शावक, जिनमें से एक पूरी तरह सफेद रंग का था!

आम तौर पर भारतीय तेंदुए का रंग सुनहरा होता है, जिस पर काले धब्बे होते हैं।

 

लेकिन सफेद रंग का तेंदुआ?

 

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह ल्यूसिज़्म (Leucism) नाम की एक दुर्लभ जैविक अवस्था हो सकती है, जिसमें शरीर में मेलेनिन नामक रंजक पदार्थ की कमी होती है — जिससे त्वचा का रंग हल्का या सफेद हो जाता है।

 

यह शावक स्नो लेपर्ड (Panthera uncia) नहीं है — स्नो लेपर्ड हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला मोटे फर वाला शिकारी होता है, जिसकी संख्या अब दुनिया भर में सिर्फ 4,000 से 6,500 के बीच बची है।

 

इनके संरक्षण के लिए WWF और Snow Leopard Trust जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं।

 

रत्नागिरी में दिखा यह सफेद तेंदुआ का शावक न केवल जैव विविधता की अद्भुत मिसाल है, बल्कि यह भी बताता है कि प्रकृति हमें आज भी चौंका सकती है — अपने रहस्यों और सौंदर्य से।

 

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Vikram singh tomar
Author: Vikram singh tomar

DWARKA NEWS NATIONAL NETWORK

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