श्री सीता नवमी 2025 आज, जानिये महत्व, पूजा विधि, पूजा मुहूर्त और मंत्र व आरती
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
जिला संपादक राजीव विजयवर्गीय
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी का पर्व मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज भगवान राम और माता सीता की पूजा अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और हर कार्य में सफलता भी मिलती है. सीता नवमी का पर्व मुख्यत: बिहार, उत्तर प्रदेश, नेपाल आदि जगहों पर ही मनाया जाता है
आज सीता नवमी 2025 का पर्व मनाया जा रहा है, हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी का पर्व मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था इसलिए इस तिथि को सीता नवमी या जानकी जयंती के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखकर विधि विधान के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा अर्चना करने से सभी रोग व शोक दूर होते हैं और 16 महान दान का पुण्य फल प्राप्त होता है. सीता माता को त्रेतायुग की सबसे पवित्र, त्यागमयी और संयमशील स्त्रीत्व की प्रतीक के तौर पर जाना जाता है. आइए जानते हैं सीता नवमी का महत्व, पूजा विधि और मुहूर्त…
सीता नवमी का महत्व
हिंदू धर्म में सीता नवमी का विशेष महत्व है. शास्त्रों व पुराणों के अनुसार, वैशाख मास की नवमी तिथि को पुष्य नक्षत्र के मध्याह्न काल में राजा जनक संतान प्राप्ति की कामना के लिए यज्ञ करने के लिए भूमि को तैयार कर रहे थे. जब राजा जनक हल चला रहे थे, तभी उनको पृथ्वी से एक बालिक की प्राप्ति हुई थी. इसलिए नवमी तिथि को सीता माता को जन्मोत्सव मनाया जाता है. त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने राम और माता लक्ष्मी ने सीता के रूप में जन्म लिया था. इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है. यह व्रत करने से जीवन में सुख-शांति आती है और वैवाहिक जीवन मजबूत रहता है.









