बिजली का झटका! एमपी में महंगी हुई बिजली, बिल पर 10% तक बढ़ा बोझ

टैरिफ बढ़ोतरी के बाद एफपीपीएस ने भी बढ़ाया भार; ताप बिजलीघरों का कम उत्पादन बना बड़ी वजह
जबलपुर | द्वारका न्यूज़ | प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर | 4 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर एक बार फिर महंगी बिजली का असर दिखाई देने लगा है। टैरिफ में बढ़ोतरी और ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएस) को मिलाकर उपभोक्ताओं की बिजली लागत पर करीब 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त भार पड़ने का दावा सामने आया है। इसका सीधा असर आने वाले बिजली बिलों पर दिखाई दे सकता है।
अपने बिजलीघरों में कम उत्पादन, बाहर से महंगी बिजली खरीदने की मजबूरी
प्रदेश के ताप विद्युत गृहों में कम उत्पादन को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में मध्य प्रदेश के ताप बिजलीघरों का प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) करीब 70 प्रतिशत रहा, जबकि पड़ोसी छत्तीसगढ़ में यह 76.12 प्रतिशत दर्ज किया गया।
यानी मध्य प्रदेश के ताप बिजलीघरों का क्षमता उपयोग छत्तीसगढ़ की तुलना में करीब 6.12 प्रतिशत कम रहा। जब अपने बिजलीघरों से पर्याप्त उत्पादन नहीं होता, तो प्रदेश की मांग पूरी करने के लिए बाहर से बिजली खरीदनी पड़ती है। महंगी दर पर खरीदी गई बिजली की लागत अंततः बिजली व्यवस्था की कुल लागत में जुड़ती है।
मार्च का -0.63% एफपीपीएस, सितंबर में पहुंचा 5.063%
एफपीपीएस में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मार्च में एफपीपीएस -0.63 प्रतिशत था, जो सितंबर में बढ़कर 5.063 प्रतिशत हो गया। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 से बिजली दरों में करीब 4 प्रतिशत की वृद्धि लागू है।
टैरिफ वृद्धि और एफपीपीएस को मिलाकर उपभोक्ताओं पर बिजली की लागत में करीब 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त भार का असर दिखाई दे रहा है।
पीएलएफ में अंतर से उत्पादन पर बड़ा असर
मध्य प्रदेश में ताप विद्युत की कुल स्थापित क्षमता करीब 4,570 मेगावाट बताई गई है। उपलब्ध आकलन के मुताबिक पीएलएफ में एक प्रतिशत के अंतर से करीब 20 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
इस आधार पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच 6.12 प्रतिशत पीएलएफ अंतर से करीब 120 करोड़ यूनिट संभावित उत्पादन अंतर बैठता है। कम उत्पादन के कारण बाहर से बिजली खरीदने की जरूरत बढ़ती है और उसका वित्तीय प्रभाव अंततः बिजली व्यवस्था तथा उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
उपभोक्ताओं पर दोहरी मार
एक तरफ पहले ही बिजली दरों में बढ़ोतरी लागू हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर एफपीपीएस बढ़ने से बिल का बोझ और बढ़ रहा है। ऐसे में कम उत्पादन, बाहर से बिजली खरीद और बढ़ती समायोजन लागत का असर आखिरकार प्रदेश के आम बिजली उपभोक्ता की जेब पर पड़ रहा है।







