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लाडली बहनों ने घेरा ‘मामा शिवराज का घर’, मानदेय के मुद्दे पर उठाए सवाल

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लाडली बहनों ने घेरा ‘मामा शिवराज का घर’, मानदेय के मुद्दे पर उठाए सवाल

 

 

शिवराज सिंह चौहान के बड़े ऐलान के बाद भी आंगनवाड़ी रसोइयों की हालत पर सवाल, महज 2 हजार रुपये महीने में कैसे चलेगा घर?

 

भोपाल | द्वारका न्यूज़ | प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर

 

मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और रसोइयों के मानदेय का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। महिला हितैषी योजनाओं और लाडली बहना योजना को लेकर राजनीतिक दावों के बीच आंगनवाड़ी में काम करने वाली रसोइयों के मानदेय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि दिनभर जिम्मेदारी निभाने के बावजूद कई रसोइयों को महज 2,000 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

 

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर कई घोषणाएं हुई थीं। लेकिन महिला संगठनों और संबंधित कर्मचारियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि घोषणाओं और वास्तविक आर्थिक राहत के बीच इतनी दूरी क्यों है?

 

केरल से तुलना, मध्य प्रदेश में बढ़ोतरी की मांग

 

आंगनवाड़ी रसोइयों के मानदेय की तुलना केरल जैसे राज्यों से करते हुए महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि वहां मिलने वाली राशि मध्य प्रदेश से काफी अधिक है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, केरल में संबंधित कर्मियों को 12 हजार रुपये से अधिक मिलने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में मानदेय, सरकारी सहायता और अन्य लाभों की व्यवस्था अलग होती है, इसलिए इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

 

घोषणाएं बड़ी, राहत का इंतजार कब तक?

 

महिलाओं का कहना है कि सरकार महिला सशक्तीकरण की बात करती है, लेकिन आंगनवाड़ी केंद्रों पर काम करने वाली रसोइयों और सहायिकाओं की आर्थिक स्थिति पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। महंगाई के इस दौर में 2,000 रुपये मासिक मानदेय से परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल है।

 

अब मांग उठ रही है कि आंगनवाड़ी रसोइयों और सहायिकाओं के मानदेय की समीक्षा कर सम्मानजनक भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, पूर्व में की गई घोषणाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कर्मचारियों को कितना लाभ मिला है।

 

सबसे बड़ा सवाल: महिला सशक्तीकरण के दावों के बीच आंगनवाड़ी रसोइयों को सम्मानजनक मानदेय कब मिलेगा? क्या सरकार इन महिलाओं की आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएगी, या इन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

Vikram singh tomar
Author: Vikram singh tomar

DWARKA NEWS NATIONAL NETWORK

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