आज है मोक्षदा एकादशी, जानें भगवान श्री हरी विष्णु के व्रत की विधि, मुहूर्त और धार्मिक महत्व
द्वारका न्यूज़
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
सनातन परंपरा में मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि मोक्षदा एकादशी कहा जाता है. जिस मोक्षदा एकादशी पर विधि विधान से व्रत रखने वाले व्यक्ति श्री हरि की कृपा से साधक सभी सुखों को भोगता हुआ अंत में मोक्ष को प्राप्त होता, आज वह भद्रा के साया रखा जाएगा. मोक्षदा एकादशी पर श्री हरि की पूजा विधि, शुभ-अशुभ समय और धार्मिक महत्व जानने के लिए पढ़ें
सनातन परंपरा में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की 11वीं तिथि एकादशी कहलाती है. यह पावन तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा, जप, तप और व्रत के लिए समर्पित है. हिंदू मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने पर साधक के जीवन से जुड़े सारे दोष दूर होते और उसे पुण्यफल प्राप्त होते हैं. इस एकादशी का महत्व तब और भी बढ़ जाता है, जब यह मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष में पड़ती है और मोक्षदा एकादशी कहलाताी है क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. आइए मोक्षदा एकादशी तिथि की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व को विस्तार से जानते हैं.
मोक्षदा एकादशी का मुहूर्त
पंचाग के अनुसार अगहन मास के शुक्लपक्ष की मोक्षदा एकादशी का व्रत आज रखा जाएगा. यह पावन एकादशी तिथि 30 नवंबर 2025, रविवार को 09:29 बजे से शुरू होकर आज 01 दिसंबर 2025, सोमवार की शाम 07:01 बजे पूर्ण हो जाएगी. यह व्रत भद्रा के साये और पंचक के दौरान रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार आज भद्रा प्रात:काल 08:20 से प्रारंभ होकर शाम 07:01 बजे रहेगी. वहीं जिस पारण के बगैर यह व्रत अधूरा माना जाता है, उसे श्री हरि के साधक कल 02 दिसंबर 2025, मंगलवार को प्रात:काल 06:57 से लेकर 09:03 बजे के बीच कर सकेंगे.









