आज दिनांक 26 11 2025 को जिला सवर्ण आर्मी के साथ ब्राह्मण समाज एवं करनी सेना के संयुक्त तत्वाधान में आई ए एस संतोष वर्मा का पुतला जलाया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सोपा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

*आज दिनांक 26 11 2025 को जिला सवर्ण आर्मी के साथ ब्राह्मण समाज एवं करनी सेना के संयुक्त तत्वाधान में आई ए एस संतोष वर्मा का पुतला जलाया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सोपा*  

द्वारका न्यूज़ प्रधान संपादक

गुना मप्र

जिला सवर्ण आर्मी गुना के अध्यक्ष विक्रम सिंह तोमर ने बताया सर्व समाज के नेतृत्व में आज हनुमान चौराहे पर विवादित आई ए एस संतोष वर्मा पुतला जलाया क्योंकि इसने अजाक्स के सम्मेलन में ब्राह्मण समाज के प्रति अभद्र टिप्पणी की थी और बोला की कोई \”ब्राह्मण अपनी बेटी को मेरे बेटे के लिए दान दे दे या मेरे बेटे से कोई ब्राह्मण कन्या अवैध संबंध बना ले तब तक आरक्षण जारी रहेगा \”

एवं उसके बाद ब्राह्मण समाज सवर्ण आर्मी और सर्व समाज ने राज्य सरकार के नाम पर ज्ञापन शोपा एवं मांग की

विक्रम तोमर ने जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ज्ञापन देते हुए राष्ट्रपति के नाम संबोधित किया एवं बताया कीयदि कोई IAS अधिकारी सामान्य जाति के लोगों और महिलाओं के बारे में अपमानजनक या अभद्र टिप्पणी करता है, तो उसे गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई और आपराधिक कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, भले ही वह किसी भी जाति का हो। ऐसी टिप्पणियाँ सिविल सेवा आचरण नियमों और भारतीय कानूनों का उल्लंघन हैं।

संभावित सजाएँ और कार्रवाई इस प्रकार हैं:

1. अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action)

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 (All India Services (Conduct) Rules, 1968) के तहत आते हैं। इन नियमों के उल्लंघन पर निम्नलिखित कार्रवाई हो सकती है:

निलंबन अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा सकता है।

चेतावनी/निंद मामले की गंभीरता के आधार पर आधिकारिक चेतावनी या निंदा की जा सकती है।

पद से हटाना : गंभीर कदाचार पाए जाने पर अधिकारी को सेवा से हटाया जा सकता है।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति अधिकारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।

पेंशन लाभों में कमी (Reduction in pensionary benefits): सेवानिवृत्ति लाभों को घटाया जा सकता है।

अनुशासनात्मक कार्यवाही केंद्र सरकार द्वारा की जाती है (चूंकि IAS अधिकारी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं), आमतौर पर संबंधित राज्य सरकार की सिफारिश पर जहां अधिकारी तैनात होता है।

2. आपराधिक कानूनी कार्रवाई (Criminal Legal Action)

अभद्र टिप्पणी, विशेषकर जाति या लिंग के आधार पर, भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत विभिन्न अपराधों को आकर्षित कर सकती है।

घृणास्पद भाषण (Hate Speech): यदि टिप्पणियाँ विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य या दुश्मनी को बढ़ावा देती हैं, तो IPC की धारा 153A (धर्म, जाति आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत 3 साल तक की कैद हो सकती है।

महिलाओं का अपमान (Insult to Women): महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा या अपमानजनक टिप्पणियों के लिए IPC के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

मानहानि (Defamation): यदि टिप्पणियाँ किसी व्यक्ति या समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाती हैं, तो मानहानि का मुकदमा दायर किया जा सकता है।

3. अन्य प्रभाव

राष्ट्रीय आयोगों का हस्तक्षेप: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) या राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) जैसे निकाय मामले का संज्ञान ले सकते हैं और सरकार से रिपोर्ट मांग सकते हैं, जिससे कार्रवाई सुनिश्चित होती है।

जनता का दबाव: ऐसे मामलों में अक्सर व्यापक जन आक्रोश और मीडिया का ध्यान आकर्षित होता है, जिससे सरकार पर सख्त कार्रवाई करने का दबाव बनता है।

संक्षेप में, एक IAS अधिकारी का पद गरिमा और जिम्मेदारी की मांग करता है। जाति या लिंग के आधार पर की गई कोई भी अपमानजनक टिप्पणी न केवल सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि एक आपराधिक कृत्य भी है, जिसके परिणामस्वरूप नौकरी खोने से लेकर जेल जाने तक की सजा हो सकती है।

इस अवसर पर सर्व सनातन समाज, करणी सेना,

सवर्ण आर्मी, जिला ब्राह्मण समाज गुना एवं अलग-अलग समाज सेवी एवं अन्य संस्थाओं के कार्यकर्ता उपस्थित रहे

Vikram singh tomar
Author: Vikram singh tomar

DWARKA NEWS NATIONAL NETWORK

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें