*स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने नाम-जप की शक्ति को समझाने के लिए एक निष्ठावान साधु का उदाहरण दिया। वह साधु अत्यंत सरल था और अपने पास केवल एक कमंडल और एक विशेष ग्रंथ रखता था। वह उस ग्रंथ की बड़ी श्रद्धा से पूजा करता और एकांत में उसे बड़े चाव से पढ़ता था।*
*जब रामकृष्ण देव ने उत्सुकतावश वह ग्रंथ माँगा, तो उन्होंने देखा कि उस पूरी पुस्तक में आदि से अंत तक केवल ‘ॐ रामः’ लिखा था। जब साधु से इसका कारण पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी सहजता से उत्तर दिया कि संसार के समस्त वेदों, शास्त्रों और पुराणों का ज्ञान अंततः ईश्वर के एक नाम में ही समाहित है। प्रभु और उनका नाम अभिन्न हैं, इसलिए अनेक ग्रंथों के बोझ के बजाय केवल प्रभु-नाम को ही पकड़ लेना पर्याप्त है।*
👉🏻मुख्य संदेश:
*परमात्मा की प्राप्ति के लिए पांडित्य या भारी ग्रंथों की नहीं, बल्कि नाम-जप के प्रति अडिग विश्वास और सरल हृदय की आवश्यकता होती है। समस्त शास्त्रों का सार प्रभु के नाम में ही निहित है*
* *राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम की जय* 🙏








