“बेटियां ही नहीं, बेटे भी खतरे में”: गुना कोर्ट की टिप्पणी बनी फैसले का सबसे बड़ा संदेश

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POCSO कोर्ट का बड़ा संदेश: “बेटियों की तरह बेटों की सुरक्षा भी समाज की जिम्मेदारी”

द्वारका न्यूज़ :

प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर

जिला संवाददाता : मोहनीश भार्गव

2. दुष्कर्म के दोषी को 20 साल कैद, कोर्ट बोला- बच्चों के खिलाफ अपराध बर्दाश्त नहीं

 

3. मासूम को इंसाफ: विशेष अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, आरोपी को 20 साल की सजा

 

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गुना पॉक्सो कोर्ट सख्त: नाबालिग से दुष्कर्म पर 20 साल की सजा, समाज को दिया बड़ा संदेश

 

गुना। विशेष पॉक्सो न्यायालय के एक महत्वपूर्ण फैसले ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने नाबालिग बालक से दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि आज केवल बेटियां ही नहीं, बेटे भी यौन अपराधों के खतरे का सामना कर रहे हैं।

 

अदालत ने माना कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है। न्यायालय ने आरोपी पर अर्थदंड लगाने के साथ पीड़ित बालक को 4 लाख रुपये प्रतिकर देने के आदेश भी दिए।

 

फैसले को बाल संरक्षण और बच्चों के अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय की टिप्पणी ने यह संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवार, समाज और प्रशासन सभी को समान रूप से सजग रहने की आवश्यकता है।

 

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“बेटियां ही नहीं, बेटे भी खतरे में”: गुना कोर्ट की टिप्पणी बनी फैसले का सबसे बड़ा संदेश

Vikram singh tomar
Author: Vikram singh tomar

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