बिना अस्पताल के 87 कर्मचारियों की पोस्टिंग!
इंदौर के खजराना में ‘कागजी अस्पताल’ पर उठे बड़े सवाल, विपक्ष ने बताया करोड़ों का घोटाला

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के खजराना क्षेत्र में प्रस्तावित 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। जिस अस्पताल की इमारत आज तक नहीं बनी, उसके लिए 87 कर्मचारियों की नियुक्ति और तबादले होने का मामला सुर्खियों में है।
वर्ष 2020 में अस्पताल को मंजूरी मिली थी, लेकिन भूमि विवाद के कारण निर्माण शुरू नहीं हो सका। इसके बावजूद अस्पताल के नाम पर पद स्वीकृत हुए और कर्मचारियों की पोस्टिंग होती रही। इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि अस्पताल का निर्माण जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण नहीं हो सका। उन्होंने दावा किया कि स्वीकृत कर्मचारियों को अन्य स्वास्थ्य संस्थानों और संजीवनी क्लीनिकों में सेवाएं देने के लिए संबद्ध किया गया था।
अब यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष इसे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित वित्तीय अनियमितता बता रहा है, जबकि सरकार किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार कर रही है।
मुख्य बिंदु
– 2020 में 100 बिस्तरों वाले अस्पताल को मिली थी मंजूरी।
– जमीन विवाद के कारण निर्माण शुरू नहीं हो सका।
– अस्पताल बने बिना 87 कर्मचारियों की पोस्टिंग का मामला सामने आया।
– विपक्ष ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
– सरकार का दावा—कर्मचारियों को अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में किया गया था अटैच।






