₹22,006 करोड़ का कर्ज, निपटान सिर्फ ₹6.5 करोड़ में! NCLT ने सुभाष चंद्रा की डील को दी मंजूरी, 99.97% Haircut से मचा हड़कंप
द्वारका न्यूज़। प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
नई दिल्ली | बिजनेस डेस्क
29 अगस्त 2026

एस्सेल ग्रुप और जी एंटरटेनमेंट के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़े एक बड़े कर्ज निपटान मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने अहम फैसला सुनाया है। करीब ₹22,006 करोड़ की देनदारी से जुड़े इस मामले में महज ₹6.5 करोड़ के भुगतान प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की खबर ने बैंकिंग और कॉर्पोरेट जगत में चर्चा तेज कर दी है।
₹22 हजार करोड़ के कर्ज पर सिर्फ ₹6.5 करोड़ का भुगतान
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 99.97 प्रतिशत के हेयरकट को लेकर है। उपलब्ध विवरण के अनुसार कुल बकाया राशि करीब ₹22,006 करोड़ थी, जबकि प्रस्तावित सेटलमेंट राशि सिर्फ ₹6.5 करोड़ बताई गई है। इसका मतलब है कि कर्जदाताओं को बकाया रकम का बहुत बड़ा हिस्सा छोड़ना पड़ा।
NCLT ने कैसे दी मंजूरी?
सितंबर 2025 में NCLT की दो सदस्यीय बेंच के बीच फैसले को लेकर मतभेद हो गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में मामले को तीसरे न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा के समक्ष भेजा गया। शर्मा ने मामले पर निर्णायक फैसला सुनाते हुए भुगतान योजना को मंजूरी दे दी।
इससे पहले नवंबर 2024 में लेनदारों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में 80.814 प्रतिशत वोटिंग की थी। दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत योजना को मंजूरी के लिए 75 प्रतिशत वोट की आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रस्ताव को आवश्यक बहुमत मिल गया था।
कई बड़े बैंकों ने किया था विरोध
रिपोर्ट के मुताबिक LIC Housing Finance, HDFC, Axis Bank, Canara Bank और Union Bank समेत कुछ कर्जदाताओं ने प्रस्ताव का विरोध किया था। हालांकि, विरोध करने वाले कर्जदाताओं की कुल वोटिंग हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से कम रहने के कारण प्रस्ताव आवश्यक बहुमत हासिल करने में सफल रहा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
सुभाष चंद्रा और एस्सेल ग्रुप से जुड़े कर्ज विवाद लंबे समय से कॉर्पोरेट और बैंकिंग क्षेत्र में चर्चा का विषय रहे हैं। इतने बड़े बकाये के मुकाबले बेहद कम सेटलमेंट राशि और 99.97 प्रतिशत के कथित हेयरकट ने इस मामले को खास बना दिया है।
हालांकि, किसी भी कर्ज समाधान में हेयरकट का अर्थ सीधे तौर पर बैंक का नकद नुकसान नहीं, बल्कि बकाया दावे और स्वीकृत वसूली के बीच बड़ा अंतर होता है। इस मामले में NCLT की मंजूरी के बाद इसके कानूनी और वित्तीय प्रभावों पर भी नजर बनी हुई है।
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