हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ SC-ST एक्ट में FIR, शुद्धिकरण मामले को जातिगत रंग देने का आरोप
द्वारका न्यूज़
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
31 अगस्त 2026
खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण को लेकर विवाद; शिकायतकर्ता ने प्रेस वार्ता में दिए बयानों पर जताई आपत्ति, ASP अमित सैनी करेंगे जांच
देहरादून/हल्द्वानी। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता अमित कुमार का आरोप है कि राहुल गांधी ने दिल्ली में हुई एक प्रेस वार्ता के दौरान हल्द्वानी के रामलीला मैदान में किए गए सफाई एवं शुद्धिकरण कार्य को जातिगत भेदभाव और छुआछूत से जोड़ते हुए इसे दलित विरोधी बताया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस बयान से एक विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव का संदेश गया।
8 अगस्त की रैली के बाद हुआ था शुद्धिकरण
जानकारी के मुताबिक, 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की राजनीतिक रैली आयोजित की गई थी। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। रैली के बाद एक हिंदू संगठन से जुड़े लोगों द्वारा मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ किए जाने की बात सामने आई थी।
इसी घटना को लेकर बाद में राजनीतिक विवाद शुरू हुआ। राहुल गांधी ने कथित तौर पर इस शुद्धिकरण की रस्म को दलित विरोधी बताते हुए सवाल उठाए थे।
शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR
श्रीराम धर्मार्ध सेवा समिति से जुड़े अमित कुमार ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को जातिगत रूप देकर छुआछूत से जोड़ दिया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को अपने आरोपों के समर्थन में संबंधित साक्ष्य भी सौंपे।
नैनीताल के एसएसपी टीसी मंजूनाथ के अनुसार, शिकायत और उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है।
ASP अमित सैनी करेंगे मामले की जांच
मामले की जांच की जिम्मेदारी ASP अमित सैनी को दी गई है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, राहुल गांधी के कथित बयान और शुद्धिकरण कार्यक्रम से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। जांच के बाद ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल FIR दर्ज होने का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है। मामले में पुलिस की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।









