राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिकता का संगम: पंचमुखी हनुमान आश्रम पर सावरकर जयंती समारोह का आयोजन
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर जिला संवाददाता राजीव विजयवर्गीय
द्वारका न्यूज़ गुना
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गुना जिले के प्रतिष्ठित पंचमुखी हनुमान आश्रम में राष्ट्रनायक स्वतंत्र वीर विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन महंत श्री श्री 1008 सियाराम दास जी महाराज के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। पंचमुखी हनुमान आश्रम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह स्थान राष्ट्रवाद, संस्कृति और सेवा भाव के अनूठे संगम का प्रतीक बन चुका है।
इस वर्ष सावरकर जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने एकत्र होकर सावरकर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर वीर सावरकर के जीवन, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार सावरकर ने अपने प्रखर विचारों और दृढ़ संकल्प से स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
यह उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष सावरकर जयंती के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें अनेक युवाओं और समाज सेवकों ने हिस्सा लिया था। इसी कड़ी में इस वर्ष भी राष्ट्रसेवा की परंपरा को निभाते हुए, 23 मार्च को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस पर एक विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया गया था। इस शिविर में 108 यूनिट रक्त एकत्र किया गया — यह न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक था, बल्कि समाज के लिए जीवनदायी योगदान भी था।
पंचमुखी हनुमान आश्रम अपने कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश देता है कि धर्म और राष्ट्रसेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। यहां केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथियों को भी उसी श्रद्धा से मनाया जाता है, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके विचारों से प्रेरणा ले सकें।
महंत सियाराम दास जी महाराज का यह सतत प्रयास है कि आध्यात्मिकता के साथ-साथ सामाजिक चेतना भी जाग्रत हो। उनका मानना है कि “जब तक राष्ट्र में संस्कार नहीं, तब तक संकल्प अधूरे हैं।” आश्रम द्वारा किए जा रहे ये आयोजन न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि सम्पूर्ण समाज में राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत कर रहे हैं।
वीर सावरकर जी की जयंती पर यह आयोजन एक बार फिर से यह सिद्ध करता है कि हम अपने इतिहास, अपने नायकों और अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूल सकते — और न ही भूलना चाहिए।









