आज मनाया जा रहा है गंगा दशहरा धूमधाम से पूरे भारत में
द्वारका न्यूज़
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
????*।। शुभ गंगा दशहरा ।।*????
‼️गंगा दशहरा का पावन पर्व मानव जीवन को तीन महत्वपूर्ण सूत्र प्रदान करता है-प्रयास, परीक्षा, तितिक्षा और उसके पश्चात सफलता। प्रयास जीवन में लक्ष्य प्राप्ति की प्रथम शर्त है। जितना बड़ा लक्ष्य होगा प्रयास भी उसी अनुपात में होना चाहिए। इसलिए बड़े लक्ष्य को पाना हो तो आपका प्रयास भी बड़ा ही होना चाहिए। लक्ष्य की दिशा में बढ़ते हुए परीक्षा दूसरा सोपान है। सफलता का कोई बाईपास नहीं होता, वो तो संघर्ष पथ पर सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़कर ही प्राप्त करनी होती है। लक्ष्य प्राप्ति में आने वाली विघ्न-बाधाएं ही आपकी परीक्षा है। तितिक्षा ही जीवन की परीक्षा में डटे रहने की सामर्थ्य प्रदान करती है। प्रयास और परीक्षा के बाद जीवन में धैर्य का होना भी अनिवार्य है।‼️
????धैर्य ही वो ऊर्जा है जो अनेक कठिनाइयों के बावजूद भी किसी व्यक्ति को उसके लक्ष्य की ओर निरंतर गतिमान रखती है। श्रेष्ठ के लिए सदा प्रयत्नशील रहें, कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए सदा ऊर्जावान रहें और प्रत्येक विषम से विषम परिस्थितियों में भी धैर्यवान बने रहें। निश्चित ही माँ गंगा भी धरती पर उतरेंगी, आप राजा भगीरथ की तरह श्रेष्ठ संकल्प के साथ जीना तो सीखिए। ????
????गंगा का जिस दिन धरती में अवतरण हुआ था, यानि जिस दिन वो धरती में पहुंची थी, उसे आज हम गंगा दशहरा के रूप में मनाते है।????
????*गंगा जी की पृथ्वी पर अवतरण की कथा-*????
????श्रीराम जी की नगरी अयोध्या में एक राजा हुआ करते थे, सगर। इनकी 2 रानियाँ थी, जिसमें से एक रानी को 60 हजार पुत्र थे, व दूसरी को सिर्फ एक पुत्र था. राजा ने अपने राज्य का विस्तार करने के लिए अश्वमेव यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने समूचे भारत में भ्रमण के लिए और सभी राजाओं को बताने के लिए अपने अश्व को छोड़ा। देवराज इंद्र राजा सगर का यह यज्ञ सफल नहीं होने देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अश्व को चोरी कर लिया।????
????सगर राजा के सभी बेटे इस घोड़े की खोज में लग गए, समस्त पृथ्वी में खोज करने के बाद भी अश्व का कुछ पता न चला।जिसके बाद राजा ने पाताल लोक में खोज करने का हुक्म दिया. पाताल में खुदाई हुई, उसी समय वहां महामुनि कपिल की समाधी लगी हुई थी, जो घोर तपस्या में लीन थे। उन्ही के समाधी के पास घोडा भी था, जिसे देख राजा के बेटों को ग़लतफहमी हो गई, और वे चिल्लाने लगे, जिससे कपिल महाराज की तपस्या भंग हो गई, और उनकी घोर तपस्या की तपन से राजा के 60 हजार पुत्र वहीँ राख का ढेर हो गए।????
????दुसरे पुत्र ने अपने पिता को जाकर पूरी बात बताई। यहीं महाराज गरुड़ भी आये, जिन्होंने राजा सगर को अपने 60 हजार पुत्र मुक्ति प्राप्ति के लिए सिर्फ एक ही रास्ता बताया. उन्होंने बोला तुम्हें तपस्या करके गंगा को धरती पर लाना होगा, जैसे ही गंगा धरती में आएँगी, तुम्हारे पुत्रों की भस्मी पर पड़कर वे सब मुक्त हो जायेंगें।????
????????सगर और उनके पुत्र ने तपस्या की, लेकिन सफल नहीं हो पाये. इसके पश्चात् सगर राजा का पौत्र भागीरथ का जन्म हुआ। अपने पूर्वज के इस अधूरे काम को उसने अपना कर्तव्य समझा और ब्रह्मा जी की कठिन तपस्या की. ब्रह्मा जी खुश होकर प्रकट हुए, और वरदान मांगने को कहा।????????
‼️भागीरथ ने गंगा को धरती में भेजने की मांग की. लेकिन यहाँ ब्रह्मा जी ने बताया कि, धरती में इतना बल नहीं है कि वो गंगा के भार को सहन कर सके, अतः तुम्हें शिव से इसमें मदद लेनी चाहिए, वे ही है जो गंगा को धरती पर अपने द्वारा भेज सकते है।
उस समय गंगा ब्रह्मा के कमंडल में थी, जिसे उन्होंने शिव की जटाओं में अवतरित किया। भागीरथ ने अब फिर शिव की कड़ी तपस्या की, वे सालों एक अंगूठे पर खड़े रहे. इस दौरान गंगा कई सालों तक शिव की जटाओं में ही रही, वे इसमें से निकलना चाहती थी, और रसातल जाना चाहती थी। लेकिन इतनी जटिल जटाओं में वे खो ही गई, उन्हें बाहर निकलने का रास्ता ही समझ नहीं आता था।‼️
????️भागीरथ की तपस्या से खुश होकर शिव ने उन्हें दर्शन दिए, और वरदान पूरा करने का आश्वासन दिया. इसी के बाद गंगा जी की सात धाराएँ, हिमालय के बिन्दुसार से होते हुए पृथ्वी पर आई। पृथ्वी में आते ही गंगा का विशाल रूप देख मानव जाती परेशान हो गई, उन्हें लगा भूचाल आ गया। जिस रास्ते से गंगा निकल रही थी, वहां कई ऋषि मुनियों के आश्रम भी थे, जिसमें से एक थे महाराज जह्नु. गंगा को आता देख, वे समझे ये कोई राक्षस की क्रीड़ा है, तथा उन्होंने उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया. भागीरथ समेत सभी देवताओं ने उनसे विनती की, तब वे माने. इसी के बाद से उनका नाम जान्हवी पड़ा।????️
????इसके बाद भागीरथ ने अपने 60 हजार पूर्वज को मुक्ति दिलाई. यहाँ से गंगा को एक नया नाम भी दिया गया भागीरथी।????
????गंगा मईया की जय ????
????आज गंगा दशहरा के शुभ अवसर पे धर्म कार्य में दान पुण्य का कार्य अवश्य करें। स्नान, दान एवं व्रत का यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख- समृद्धि लेकर आए, ऐसी माँ गंगा से कामना है ।????
????गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करना और दान-पुण्य का कार्य करना अत्यधिक शुभ माना गया है। अगर आप गंगा में स्नान नही कर पा रहें है तो किसी पवित्र जलाशय या घर पे ही पानी में गंगा जल डालकर स्नान अवश्य करें। आज के दिन स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती हैं।????
????*हर – हर गंगे* ????









