जिला अस्पताल गुना में डॉक्टरों की लापरवाही के चलते पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश
द्वारका न्यूज़ नेशनल नेटवर्क
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भारी हंगामा, 4 दिन में दो जुड़वां बच्चों की मौत
परिजनों ने लगाया डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप
गुना । जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई वार्ड में गुरुवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब एक परिवार ने अपने दो जुड़वां बच्चों की मौत के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों की घोर लापरवाही और गलत उपचार के कारण उनके हंसते-खेलते बच्चों की जान चली गई।
क्या है पूरा मामला?
फरियादी पिता पवन अहिरवार ने बताया कि उनकी पत्नी की डिलीवरी 22 फरवरी को हुई थी, जिसमें दो जुड़वां लडक़ों का जन्म हुआ। जन्म के बाद डॉक्टरों ने बच्चों की हालत गंभीर बताते हुए उन्हें बेहतर देखरेख के लिए स्हृष्ट वार्ड में भर्ती कर दिया। दुखों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब 24 फरवरी को पहले बच्चे की मौत हो गई। उस समय डॉक्टरों ने परिवार को ढांढस बंधाया कि दूसरा बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और घबराने की बात नहीं है।
खून चढ़ाने के बाद बिगड़ी हालत?
परिजनों के अनुसार, गुरुवार शाम 6 बजे तक दूसरा बच्चा बिल्कुल ठीक था। पवन अहिरवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चे को रक्त (ब्लड) चढ़ाया था, जिसके कुछ ही देर बाद अचानक उसकी मौत की खबर दे दी गई। परिजनों ने डॉक्टरों के विरोधाभासी बयानों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर अब तर्क दे रहे हैं कि बच्चे के फेफड़े विकसित नहीं थे; यदि फेफड़े नहीं थे, तो उसे रक्त क्यों चढ़ाया गया? खून चढ़ाने के तुरंत बाद ही उसकी जान क्यों गई?
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
हंगामे की सूचना मिलते ही अस्पताल में भीड़ जमा हो गई। गुस्साए परिजनों ने वार्ड के बाहर नारेबाजी की और मांग की कि जिन डॉक्टरों की लापरवाही से उनके दो-दो बच्चों की जान गई है, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वे यह लड़ाई इसलिए लड़ रहे हैं ताकि भविष्य में किसी और गरीब परिवार के साथ ऐसा अन्याय न हो। अस्पताल प्रबंधन ने फिलहाल इस मामले में आंतरिक जांच की बात कही है, लेकिन पीड़ित परिवार डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर अड़ा हुआ है।









