महिला आरक्षण बिल 2023 “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” लोकसभा में पास नहीं हो पाया
द्वारका न्यूज़
प्रमुख संपादक विक्रम सिंह तोमर

नई दिल्ली
महिला आरक्षण बिल, जिसका आधिकारिक नाम संविधान (एक सौ अट्ठाईसवां संशोधन) अधिनियम, 2023 या नारी शक्ति वंदन अधिनियम है, 19 सितंबर, 2023 को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने के उद्देश्य से पेश किया गया था।
इस बिल का मकसद महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है; यह आरक्षण 2026 की जनगणना के बाद होने वाले पहले परिसीमन (सीटों के पुनर्निर्धारण) के बाद लागू होगा।
महिला आरक्षण बिल से जुड़ी मुख्य बातें:
• लक्षित प्रतिनिधित्व: लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में 33% (एक-तिहाई) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
• लागू करने की प्रक्रिया: यह कोटा केवल जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करना) के बाद ही लागू होगा।
• अवधि: यह आरक्षण शुरू में 15 साल के लिए है, जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
• मौजूदा स्थिति (अप्रैल 2026): अप्रैल 2026 में इस प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) बिल पास करने की हालिया कोशिशों में, पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े; इस तरह यह बिल लोकसभा में ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा।
• SC/ST का समावेश: यह आरक्षण अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होता है।
यह बिल संविधान में संशोधन करके नए अनुच्छेद जोड़ने का प्रस्ताव करता है, जिनमें अनुच्छेद 330A और अनुच्छेद 332A शामिल हैं, ताकि इन प्रावधानों को विशेष रूप से लागू किया जा सके।









