गुनिया नदी पर बढ़ते अतिक्रमण से खतरे की घंटी
✍️ प्रधान संपादक – विक्रम सिंह तोमर
द्वारका न्यूज़ नेशनल नेटवर्क
हर वर्ष बाढ़ बन रही जन-धन की तबाही का कारण, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
गुना, 22 मई।
शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली गुनिया नदी आज अतिक्रमण, राजनीतिक संरक्षण और असामाजिक तत्वों की मनमानी का शिकार होती जा रही है। नदी किनारे लगातार हो रहे अवैध कब्जों ने न केवल नदी के प्राकृतिक बहाव को बाधित कर दिया है, बल्कि हर वर्ष बारिश के मौसम में शहरवासियों के लिए बाढ़ और भारी नुकसान का खतरा भी बढ़ा दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों और भूमाफियाओं द्वारा नदी के दोनों किनारों पर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर नदी की जमीन पर कब्जा कर प्लॉटिंग और व्यवसायिक गतिविधियां तक संचालित की जा रही हैं। इससे नदी का दायरा लगातार सिकुड़ता जा रहा है।
बारिश के दौरान जब गुनिया नदी उफान पर आती है, तब निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति बन जाती है। कई परिवारों को अपने घर छोड़ने तक की नौबत आ जाती है। हर साल बाढ़ के कारण लोगों को आर्थिक नुकसान, मकानों में पानी भरने और यातायात बाधित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते नदी से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि गुनिया नदी का सीमांकन कर अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा नदी के संरक्षण के लिए स्थायी योजना बनाई जाए।
नदी संरक्षण को लेकर प्रशासनिक दावे लगातार किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाते हैं।
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