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मोदी सरकार के आर्थिक दावों पर फिर उठे सवाल, महंगाई से चीन तक आंकड़ों ने बढ़ाई बहस

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मोदी सरकार के आर्थिक दावों पर फिर उठे सवाल, महंगाई से चीन तक आंकड़ों ने बढ़ाई बहस

 द्वारका न्यूज़

 

प्रधान संपादक

विक्रम सिंह तोमर

2 सितंबर 2026 

 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और उनके प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सरकार के आर्थिक दावों पर सवाल उठाते हुए महंगाई, मैन्युफैक्चरिंग, चीन के साथ व्यापार घाटे और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।

 

महंगाई पर सवाल, लेकिन आंकड़ों की तस्वीर क्या कहती है?

 

वायरल वीडियो में रिटेल और होलसेल महंगाई के आंकड़ों का हवाला देकर दावा किया गया है कि सरकार महंगाई की वास्तविक स्थिति को कम करके पेश कर रही है। हालांकि उपलब्ध आधिकारिक एवं मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई 4.45% रही, जबकि थोक महंगाई 9.78% दर्ज की गई। जून में WPI महंगाई 9.87% थी।

 

यानी थोक स्तर पर कीमतों का दबाव जरूर ऊंचा बना हुआ है, लेकिन वायरल पोस्ट में बताए गए आंकड़ों को वर्तमान जुलाई के आंकड़ों के साथ मिलाकर देखना जरूरी है।

 

मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी अब भी बड़ी चुनौती

 

वीडियो में भारत की GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी को लेकर भी सवाल उठाया गया है। IMF के सितंबर 2026 के विश्लेषण के अनुसार भारत में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान करीब 13% GDP है और यह क्षेत्र लगभग 11% श्रमिकों को रोजगार देता है। IMF ने रोजगार और उत्पादकता के बीच इस अंतर को भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख चुनौतियों में गिना है।

 

चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर

 

भारत-चीन व्यापार भी इस बहस का अहम हिस्सा है। 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 151.1 अरब डॉलर रहा, जबकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया। चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर भी बन गया।

 

यह आंकड़ा ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों के साथ घरेलू उत्पादन और आयात निर्भरता पर बहस को और महत्वपूर्ण बनाता है।

 

रणनीतिक तेल भंडार पर भी बहस

 

वायरल दावे में 2018 के बाद रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता में बढ़ोतरी नहीं होने की बात कही गई है। यहां तस्वीर कुछ अधिक जटिल है। भारत की मौजूदा परिचालन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता 5.33 मिलियन टन है, जो विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पडूर में स्थित है। सरकार ने अतिरिक्त 6.5 मिलियन टन क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी और 2026 में नए विस्तार की योजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं।

 

अर्थात मौजूदा ऑपरेशनल क्षमता लंबे समय से 5.33 MMT पर बनी हुई है, लेकिन विस्तार की प्रक्रिया को पूरी तरह नकारना भी सही नहीं होगा।

 

सवाल सरकार से ज्यादा आंकड़ों की व्याख्या पर

 

आर्थिक नीतियों का मूल्यांकन केवल एक-दो आंकड़ों से नहीं किया जा सकता। महंगाई, रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग, आयात-निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा—इन सभी संकेतकों को एक साथ देखकर ही अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आती है।

 

वायरल वीडियो में उठाए गए सवालों ने सरकार के आर्थिक दावों और जमीनी आर्थिक आंकड़ों के बीच अंतर को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है। अब असली सवाल यही है—भारत की तेज GDP वृद्धि का लाभ आम उपभोक्ता, रोजगार और घरेलू उत्पादन तक कितनी मजबूती से पहुंच रहा है?

 

 

Vikram singh tomar
Author: Vikram singh tomar

DWARKA NEWS NATIONAL NETWORK

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