शिप्रा आरती पर उज्जैन में घमासान: पुलिस के पहरे में आरती, पंडों ने शुरू किया जल सत्याग्रह
द्वारका न्यूज़
प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर
विशेष संवाददाता उज्जैन
उज्जैन, 8 अगस्त 2026। धर्मनगरी उज्जैन के रामघाट पर मां शिप्रा की संध्या आरती को लेकर 11 साल पुरानी परंपरा और प्रशासनिक व्यवस्था आमने-सामने आ गई है। आरती के संचालन का अधिकार श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को सौंपे जाने के विरोध में स्थानीय तीर्थ पुरोहितों की श्री क्षेत्र पंडा समिति ने शनिवार को शिप्रा नदी में उतरकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया।
विवाद की शुरुआत 5 अगस्त को प्रशासनिक आदेश के बाद हुई। पंडा समिति का कहना है कि वर्ष 2015 से स्थानीय पुरोहित लगातार शिप्रा आरती की परंपरा निभाते आ रहे हैं और नई व्यवस्था से उनके धार्मिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
शुक्रवार शाम महाकाल मंदिर समिति के बटुक आरती की तैयारी के लिए रामघाट पहुंचे तो विरोध की स्थिति बन गई। तनाव बढ़ने पर पुलिस बल तैनात किया गया और पुलिस की मौजूदगी में आरती संपन्न कराई गई।
प्रशासन का कहना है कि आरती को हरिद्वार की गंगा आरती और अयोध्या की सरयू आरती की तर्ज पर भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने की योजना है। वहीं पंडा समिति इसे परंपरा और धार्मिक अधिकारों का मुद्दा बता रही है।
अब रामघाट पर सवाल यही है—भव्यता के साथ परंपरा का सम्मान कैसे कायम रहेगा?





