गणेश चतुर्थी 2026: विघ्नहर्ता की आराधना से दूर होंगे संकट, जानिए पूजा विधि और पौराणिक कथा
द्वारका न्यूज़ | प्रधान संपादक – विक्रम सिंह तोमर
14 सितंबर 2026

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि और सुख-समृद्धि के देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है।
प्रथम पूज्य हैं भगवान गणेश
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश सभी बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं। नए घर, व्यापार, विवाह या किसी अन्य शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश पूजन किया जाता है। सार्वजनिक गणेश उत्सव को 1893 में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने व्यापक रूप देकर इसे सामाजिक और राष्ट्रीय एकता से भी जोड़ा।
ऐसे करें गणेश जी की पूजा
गणेश चतुर्थी पर शुभ मुहूर्त में पाटे पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद संकल्प लेकर प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। पूजा में रोली, अक्षत, जनेऊ, दूर्वा, फूल और मोदक या लड्डू अर्पित किए जाते हैं। सुबह और शाम धूप, दीप एवं कपूर से भगवान गणेश की आरती की जाती है।
क्यों करते हैं गणेश प्रतिमा का विसर्जन?
परंपरा के अनुसार गणेश प्रतिमा का विसर्जन डेढ़, 3, 5, 7 या 11वें दिन किया जाता है। श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ ‘गणपति बाप्पा मोरया’ के जयकारे लगाते हुए प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।
गणेश जी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार देवता अपनी विपत्तियों का समाधान मांगने भगवान शिव और माता पार्वती के पास पहुंचे। उस समय गणेश और कार्तिकेय भी वहां मौजूद थे। शिव जी ने दोनों पुत्रों से देवताओं के संकट का समाधान करने की योग्यता साबित करने के लिए पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करने को कहा।
कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए। वहीं गणेश जी ने अपनी बुद्धि का परिचय देते हुए भगवान शिव और माता पार्वती के सात फेरे लगाए। उन्होंने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड का वास है।
गणेश जी की बुद्धि और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें देवताओं के संकट दूर करने का आशीर्वाद दिया। इसी कारण भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है।
गणेश चतुर्थी का संदेश यही है कि श्रद्धा, बुद्धि और भक्ति के साथ किया गया प्रयास जीवन की बाधाओं को दूर करने का मार्ग दिखाता है।








