वायरल रील ने बनाया शादी का टोटका ‘मेगा इवेंट’!
मोती डूंगरी की मेहंदी के लिए उमड़ा कुंवारों का सैलाब, 3500 किलो मेहंदी खत्म—अब सवाल, आस्था या सोशल मीडिया का तमाशा?
जयपुर | द्वारका न्यूज़ | प्रधान संपादक – विक्रम सिंह तोमर
जयपुर। सोशल मीडिया की एक वायरल रील ने शादी की एक स्थानीय मान्यता को ऐसा देशव्यापी रूप दे दिया कि जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में कुंवारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सिंजारा के अवसर पर मंदिर की मेहंदी को लेकर मान्यता है कि इसे लगाने से विवाह की मनोकामना पूरी होती है। देखते ही देखते यह बात पंजाब-हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों तक पहुंच गई और बड़ी संख्या में अविवाहित युवक-युवतियां जयपुर पहुंचने लगे।
बताया जा रहा है कि इस दौरान करीब 3500 किलो मेहंदी खत्म हो गई। मंदिर परिसर और आसपास भीड़ का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी।
रील ने स्थानीय मान्यता को बना दिया राष्ट्रीय आकर्षण
भारत में विवाह से जुड़ी कई लोक मान्यताएं सदियों से चली आ रही हैं। कहीं लड़कियां सोमवार का व्रत रखती हैं तो कहीं जोधपुर की धींगा गवर जैसी परंपराओं में विवाह से जुड़ी मान्यताएं देखने को मिलती हैं। लेकिन आमतौर पर इनकी पहुंच स्थानीय क्षेत्रों तक ही सीमित रहती थी।
मोती डूंगरी की मेहंदी के मामले में सोशल मीडिया ने तस्वीर बदल दी। एक वायरल रील ने मान्यता को हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों तक पहुंचा दिया और देखते ही देखते श्रद्धा, उम्मीद और रील कल्चर का अनोखा संगम बन गया।
आस्था के पीछे छिपी अकेलेपन की कहानी भी
इस भीड़ को केवल मजाक या मनोरंजन के नजरिए से देखना भी शायद पूरी तस्वीर नहीं है। विवाह की इच्छा रखने वाले हजारों युवा आज सोशल मीडिया पर अपनी निजी उम्मीदों और परेशानियों के साथ ऐसे उपायों की तलाश करते दिखाई देते हैं। सवाल यह भी है कि क्या यह सिर्फ अंधविश्वास है, या रिश्तों और विवाह को लेकर बढ़ती बेचैनी का आईना?
अब चर्चा इस बात की भी है कि जब किसी मान्यता को कैमरों और रीलों के जरिए देशभर में प्रचार मिल जाता है, तो आस्था और तमाशे के बीच की रेखा कितनी पतली रह जाती है?
अगर मंदिर की इस मेहंदी को ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया जाए, तो शायद दूर-दराज के शहरों से जयपुर आने वाली भीड़ कम हो सकती है। मगर इससे एक बड़ा सवाल जरूर सामने आता है—देशभर में विवाह की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं की इतनी बड़ी भीड़ आखिर किस सामाजिक तस्वीर की ओर इशारा कर रही है?








