मध्य प्रदेश में ‘एनालॉग पनीर’ पर शिकंजा, CM मोहन यादव का बड़ा फैसला; मिलावटखोरों के खिलाफ छापेमारी तेज
द्वारका न्यूज़ प्रधान संपादक विक्रम सिंह तोमर

भोपाल, 12 अगस्त 2026। मध्य प्रदेश सरकार ने दूध के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च और वनस्पति फैट से तैयार किए जाने वाले ‘एनालॉग पनीर’ के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह फैसला खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध से बने उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया है।
महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश देश का चौथा राज्य है, जहां एनालॉग पनीर पर इस तरह की सख्ती की गई है। आदेश के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। कई जिलों में जांच और छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त किए जाने की कार्रवाई सामने आई है।
क्या है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर में स्किम मिल्क पाउडर के साथ वनस्पति तेल, स्टार्च और इमल्सीफायर जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कीमत असली पनीर से काफी कम होती है। बाजार में असली पनीर करीब 450-470 रुपये प्रति किलो, जबकि एनालॉग पनीर लगभग 200-220 रुपये प्रति किलो तक बिकने का दावा किया जाता है। कम कीमत के कारण इसका इस्तेमाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार में होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
सरकार की कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गलत नाम से बेचे जा रहे उत्पादों और खाद्य मिलावट से बचाना है। आने वाले दिनों में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है।









