गुना जिले में सवर्ण आर्मी ने किया यूजीसी कानून का कड़ा विरोध प्रदर्शन पुतला जलाया
द्वारका न्यूज़ नेशनल नेटवर्क
प्रधान संपादक
गुना 28 जनवरी
केंद्र सरकार द्वारा ले गए यूजीसी कानून का स्वर्ण आर्मी गुना के नेतृत्व में स्वर्ण समाज के सभी वर्गों में मिलकर एक साथ एक स्वर में खड़ा विरोध प्रदर्शन किया हनुमान चौराहे पर पुतला दहन किया एवं जिला कलेक्टर पहुंचकर राष्ट्रपति महोदय के नाम पर ज्ञापन सोफा ज्ञापन में प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं
सेवा में,
महामहिम राष्ट्रपति महोदय
भारत गणराज्य
द्वारा ,
श्रीमान कलेक्टर महोदय
जिला – गुना (मध्य प्रदेश
विषय : यूजीसी (UGC) द्वारा प्रस्तावित/लागू किए गए 2026 के भेदभावपूर्ण प्रावधानों के संबंध में आपत्ति एवं आवश्यक संशोधनों हेतु निवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2026 में लागू/प्रस्तावित किए गए कुछ नियम एवं प्रावधान देश के एक बड़े वर्ग, विशेषकर सामान्य (सवर्ण) समाज के विद्यार्थियों, को अप्रत्यक्ष रूप से अपराधी, शोषक एवं दोषी के रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह न केवल संविधान की समानता की भावना (अनुच्छेद 14) के विपरीत है, बल्कि शैक्षणिक परिसरों में सामाजिक सौहार्द को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
कॉलेज एवं विश्वविद्यालय ज्ञान, संवाद और समरसता के केंद्र होते हैं। उन्हें राजनीति का अखाड़ा बनाकर छोटे-छोटे व्यक्तिगत या संस्थागत विवादों को जातिगत रंग देना, समाज को बाँटने का कार्य है। दुर्भाग्यवश, यूजीसी के वर्तमान प्रावधानों में ऐसा वातावरण बनता प्रतीत हो रहा है, जहाँ सामान्य वर्ग के छात्रों को केवल उनकी जाति के आधार पर संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है, जो अत्यंत पीड़ादायक एवं अपमानजनक है।
यह कहना आवश्यक है कि—
सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों की रक्षा आवश्यक है,
परंतु किसी एक वर्ग को संरक्षित करने के नाम पर दूसरे वर्ग को अपराधी की तरह प्रस्तुत करना न्यायोचित नहीं हो सकता।
अतः महामहिम से विनम्र निवेदन है कि—
पहला :-
तो हो तो यूजीसी 2026 के वर्तमान प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Rollback) किया जाए तथा व्यापक सामाजिक-शैक्षणिक संवाद के बाद ही किसी नए नियम को लागू किया जाए।
द्वितीय :-
यदि किसी कारणवश सरकार यूजीसी एक्ट को पूर्णतः वापस नहीं ले सकती, तो हम उसमें सरकार के सहयोग की की तरह भूमिका निभाना चाहते हैं लेकिन सरकार द्वारा यूजीसी एक्ट में तीन अनिवार्य संशोधन किए जाएँ—
1. झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर कठोर दंड का प्रावधान
यदि किसी छात्र/छात्रा द्वारा जानबूझकर झूठी शिकायत की जाती है, तो उस पर भी उसी स्तर की दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान हो, ताकि कानून का दुरुपयोग रोका जा सके।
2. समानता एवं शिकायत निवारण समितियों में संतुलित प्रतिनिधित्व
इक्वलिटी/ग्रिवेंस कमेटी में कम से कम दो सदस्य सामान्य (सवर्ण) समाज से अनिवार्य रूप से हों, जिससे निर्णय निष्पक्ष, संतुलित और विश्वासयोग्य बन सके।
3. जिस प्रकार अन्य वर्गों के लिए जातिगत भेदभाव से संरक्षण है, उसी प्रकार सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत उत्पीड़न, अपमान या भेदभाव को भी विधिक संरक्षण प्रदान किया जाए।
महोदय,
यदि सरकार उपरोक्त संशोधनों के साथ यूजीसी एक्ट को लागू करती है, तो सामान्य समाज का प्रत्येक जागरूक नागरिक इसका स्वागत करेगा। किंतु यदि वर्तमान स्वरूप में ही इन प्रावधानों को लागू किया गया, तो यह समाज में असंतोष, अविश्वास एवं टकराव को जन्म देगा।
अतः हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह ज्ञापन विरोध की एक संवैधानिक, शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक शुरुआत है।
यदि हमारी उचित एवं न्यायसंगत माँगों पर विचार नहीं किया गया, तो हम सड़क से लेकर संसद तक लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
आशा है महामहिम इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलतापूर्वक संज्ञान लेकर आवश्यक निर्देश प्रदान करेंगे।









